भारत में डिजिटल मुद्रा (क्रिप्टो करेंसी) की संभावनाएं

बीते कुछ वर्षों में हमारा देश कैस-लैस मुद्रा की ओर तेजी से अग्रसर हुआ है। इसी बीच भारत सहित पुरे विश्व में डिजिटल करेंसी या क्रिप्टो करेंसी की  लोकप्रियता अप्रत्याशित रूप से बड़ी है तथा इसके लेन-देन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अब भारत सरकार भी इस रुझान को देखते हुए अपने कदम बढ़ाती दिख रही है, इसी कड़ी मैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपने बजट 2022 -23 के भाषण के दौरान डिस्टल संपत्ति, जिसमें क्रिप्टो करेंसी और अपूरणीय टोकन (NFT: Non-Fungible Tokens) शामिल है, के हस्तांतरण से होने वाली किसी भी आय पर 30% कर लगाने की घोषणा कर अप्रत्यक्ष रूप से ही सही इसे वैधता प्रदान कर दिया है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी डिजिटल करेंसी, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), जारी करने की घोषणा की है।

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी डिजिटल करेंसी है जो कंप्यूटर एल्गोरिथम पर काम करती है। यह एक स्वतंत्र करेंसी है जिसका किसी संस्था द्वारा कोई रेगुलेशन नहीं किया जाता, यानी क्रिप्टो करेंसी का कोई भी रेगुलेटर/गारंटर नहीं होता। वर्तमान समय में 15 00 से भी अधिक क्रिप्टो करेंसी बाजार में उपलब्ध है, जो पियर -टू-पियर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में काम करती है,  पियर -टू-पियर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का अर्थ है  कि किसी दो व्यक्ति के लेनदेन के दौरान किसी थर्ड पार्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। जबकि वर्तमान में प्रचलित लेनदेन में थर्ड पार्टी के रूप में बैंक की आवश्यकता होती है। क्रिप्टो करेंसी का मूल्य अथॉरिटी या संस्था तय नहीं करती, बल्कि इसकी कीमत पूरी तरह मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। जिसके चलते इसके धारक को नोटबंदी और अवमूल्यन जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। सुरक्षा के लिहाज से भी क्रिप्टोकरंसी काफी अहम है, क्योंकि इसका लेनदेन ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होता है जिसके एक्सेस के लिए आपको अथॉरिटीकेशन की जरूरत पड़ती है। क्रिप्टो करेंसी के सिस्टम को हैक करना काफी मुश्किल है क्योंकि किसी भी ट्रांजैक्शन को हैक करने के लिए आपको पूरी ब्लॉकचेन तकनीक को माइंन करके एक साथ हैक करना पड़ेगा जो बेहद कठिन है।

वैसे तो कई देशों में क्रिप्टो करेंसी को सरकारी मान्यता मिली हुई है लेकिन ज्यादातर देश ऐसे हैं जहां क्रिप्टो करेंसी वैध नहीं मानी जाती। साथ ही कुछ देशों ने इसे ” ग्रे जोन” में रखा है, यानी वहां पर ना तो इसे कानूनी तौर पर बैन किया गया है और ना ही इसके प्रयोग को सरकारी मान्यता दी गई है। इस करेंसी के साथ सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई तो आप कहीं शिकायत नहीं कर सकते। क्योंकि इस करेंसी का कोई रेगुलेटर या गारंटर नहीं है। इसका दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसका कोई भौतिक अस्तित्व ही नहीं है, क्योंकि इसकी छपाई ही नहीं की जा सकती। इसको कंट्रोल करने के लिए कोई देश, सरकार या संस्था नहीं है। जिससे इसकी कीमतों में काफी अस्थिरता बनी रहती है, कभी-कभी इसकी कीमतों में बहुत अधिक उछाल देखने को मिलता है तो कभी बहुत ज्यादा गिरावट, जिसकी वजह से क्रिप्टोकरंसी में निवेश करना काफी जोखिम भरा सौदा भी है।

इसके अतिरिक्त क्रिप्टो करेंसी का उपयोग तमाम प्रकार के गैरकानूनी कार्यो मसलन हथियार की खरीद-फरोख्त, ड्रग सप्लाई, कालाबाजारी आदि में आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि इसका उपयोग दो लोगों के बीच ही किया जाता है, लिहाजा, यह काफी खतरनाक भी हो सकता है। इसका एक और नुकसान यह है कि यदि कोई ट्रांजैक्शन गलती से हो जाए तो उसे वापस नहीं मांगा जा सकता।

भारत सरकार ने एक संप्रभु डिजिटल मुद्रा बनाने और साथ ही, सभी निजी क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध लगाने के लिए ” क्रिप्टो करेंसी अधिकार डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2021″ ( Crypto currency and Regulation of official Digital Currency Bill ,2021 ) पेश करने की घोषणा की है। क्रिप्टो करेंसी पर चर्चा करते हुए इसके दो पहलुओं-‘ निजी क्षेत्र द्वारा जारी मुद्रा (Private Currency) तथा इस में उपयोग की जाने वाली तकनीकी ‘ ब्लॉकचेन’ और विकेंद्रीकृत बही-खाता तकनीकी ( Distributed Ledger Technology- DLT ) जैसे पक्षों को अलग-अलग समझना बहुत ही आवश्यक है। क्रिप्टो करेंसी के अध्ययन के लिए गणित समिति ने जहां किसी प्राइवेट करेंसी का विरोध किया है, वही समिति ने आरबीआई तथा सरकार को ‘ ब्लैक चेन’ व DLT ( Distributed Ledger Technology) के प्रति सकारात्मक रवैया रखने तथा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रयोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। उदाहरण के लिए दक्षिण भारत के कुछ राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल आदि) मैं सरकार के विभिन्न विभागों में सुरक्षित रूप से आंकड़ों (Data) को एकत्र एवं सुरक्षित रखने के लिए  ‘ ब्लॉकचेन’ पर कई प्रयोग किए जा रहे हैं तथा ब्लॉक जेल में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने के लिए केरल ब्लॉकचेन अकैडमी (Kerala  Block Chain Academy) की स्थापना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत में अभी तक वर्चुअल करेंसी को रेगुलेट करने वाला कोई कानून नहीं है। अनिश्चितता के बावजूद अब तक लाखों भारतीय डिजिटल करेंसी में अरबों रुपए का निवेश कर चुके हैं। ऐसे में गंभीर समस्याओं को रोकने के लिए एवं यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्रिप्टो करेंसी का दुरुपयोग ना हो तथा निवेशकों को अत्यधिक बाजार अस्थिरता और संभावित घोटालों से बचाने के लिए विनियमन एवं कुछ और कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। जैसे : क्रिप्टो करेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय सरकार कड़े केवाईसी (Know  Y:our Customer) मापदंडों, रिपोर्टिंग और कर योग्यता को शामिल करके क्रिप्टोकरंसी के व्यापार को विनियमित करें। पारदर्शिता सूचना उपलब्धता और उपभोक्ता संरक्षण के बारे में चिंताओं को दूर करने के लिए रिकॉर्ड कीपिंग, निरीक्षण, स्वतंत्र ऑडिट, निवेशक द्वारा शिकायत निवारण और विवाद समाधान पर भी विचार किया जा सकता है।

भारत वर्तमान में डिजिटल क्रांति के अगले चरण के शिखर पर है और अपनी मानव पूंजी, विशेषज्ञता और संसाधनों को इस क्रांति में शामिल कर इसके नेतृत्व कर्ता के रूप में उभर सकता है। इसके लिए केवल नीति निर्धारण को ठीक करने की आवश्यकता है। यद्यपि क्रिप्टो करेंसी व्यापार, निवेश, तकनीकी और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में तेज और कम खर्च वाली भविष्य की विनिमय प्रणाली की अवधारणा प्रस्तुत करती है। ब्लॉकचेन तकनीकी भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में उद्यमशीलता की लहर को बढ़ावा दे सकती है एवं ब्लॉकचेन डेवलपर्स से लेकर डिजाइनरों, प्रोजेक्ट मैनेजरो, बिजनेस एनालिस्ट ,प्रमोटर्स और मार्केटर्स तक विभिन्न स्तरों पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है।

परंतु वर्तमान में क्रिप्टो करेंसी के संदर्भ गोपनीयता, मूल्य स्थिरता और इसके विनियमन की किसी नीति का अभाव जैसी समस्याओं को देखते हुए देश में किसी निजी मुद्रा को अनुमति देना एक बड़ी चुनौती होगी। अत: भविष्य की जरूरतों और इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि क्रिप्टोकरंसी के संदर्भ में सरकार, डिजिटल मुद्रा के विशेषज्ञों और सभी हित धारकों के बीच समन्वय, को बढ़ाया जाए जिससे इस क्षेत्र के बारे में जन -जागरूकता को बढ़ाया जा सके। साथ ही भविष्य की जरूरतों को देखते हुए क्रिप्टो करेंसी के विनियमन के लिए एक मजबूत एवं पारदर्शी तंत्र का विकास किया जा सके। ब्लॉकचेन और क्रिप्टो संपत्ति चौथी औद्योगिक  क्रांति का एक अभिन्न अंग होगी भारतीय अर्थव्यवस्था में इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।…….

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