महाजनपद काल (छठी सदी ई. पू.)-Mahajanpad period with Map

हम जानते हैं किसिंधु घाटी सभ्यता के पतन के पश्चात वैदिक संस्कृति का उदय हुआ जो कि एक ग्रामीण संस्कृति थी। इसी संस्कृति के इन छोटे-छोटे ग्रामो ने मिलकर महाजनपदों का रूप ले लिया जो कि भारत में द्वितीय नगरीकरण के रूप में देखा जाता है। इस लेख में हम इन्हीं महाजनपदों और उनकी राजधानी व महाजनपदों से संबंधित इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं-

महाजनपद (छठी सदी ई. पू.):-

लगभग छठी शताब्दी ई. पू. में गंगा-यमुना दोआब एवं बिहार में लोहे के प्रचुर प्रयोग के कारण उत्तर भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलता है जो इस प्रकार है-

  • बड़े-बड़े प्रदेश या जनपद के निर्माण हुये, जो बाद में महाजनपद के रूप में परिवर्तित होने लगे।
  • लोहे के हथियारों के कारण योद्धा बर्ग अर्थात क्षत्रिय वर्ग  का उदय हुआ।
  • खेती के नए औजारों और उपकरणों (लोहे के) की मदद से किसान आवश्यकता से अधिक अनाज पैदा करने लगा।
  • अब राजा अपने सैनिक और प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए अधिशेष का उपयोग कर सकता था।
  • लोगों के अंदर अब प्रादेशिक भावना प्रबल होने लगी।

उपरोक्त परिवर्तनों के कारण तत्कालीन समाज में कुछ ऐसे तत्वों का जन्म हुआ जिन्होने द्वितीय नगरी क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।

जिनमें से कुछ प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं-

  1. शासक वर्ग का उदय
  2. धर्म का प्रचलन
  3. इमारतों का अस्तित्व
  4. मुद्रा का प्रचलन
  5. व्यापार-वाणिज्य का विकास
  6. लेखन कला (लिपि) का ज्ञान
  7. कर व्यवस्था
  8. वैज्ञानिक प्रगति
  9. उत्पादक वर्ग की प्रधानता

महाजनपदों के बारे में जानकारी के स्रोत:-

विभिन्न साहित्यों में इन जनपदो का उल्लेख देखने को मिलता है।

जैसे-

  1. बौद्ध ग्रंथ के अंगुत्तर निकाय में सोलह महाजनपदों का वर्णन।
  2. जैन ग्रंथ में भगवती सूत्र व सूत्र कृतांग में।
  3. महान वैयाकार पाणिनी की पुस्तक अष्टाध्यायी में लगभग 21 महाजनपदों का उल्लेख।
  4. महाभारत में उपलब्ध जनपदों की सूची से।

महाजनपदों के नाम और उनकी राजधानी:-

महाजनपद राजधानी
1. काशी वाराणसी
2. कौशल श्रावस्ती/अयोध्या (साकेत)
3. अंग चम्पा
4. मगध गिरिव्रज, राजगृह
5. वत्स कौशाम्बी
6. वज्जि विदेह व मिथिला
7. मल्ल कुशीनारा व पावा
8. अवन्ति उज्जयिनी व महिष्मति
9. चेदि सोत्थिवती ( शुक्तिमति)
10. अश्मक पोटन (पोटली)
11. कुरू इन्द्रप्रस्थ
12. पांचाल उत्तरी पांचाल – अहिच्छत्र

दक्षिणी पांचाल – कांपिल्य

13. मत्स्य विराटनगर
14. शूरसेन मथुरा
15. गांधार तक्षशिला
16. कम्बोज हाटक अथवा राजपुर

16 महाजनपद मानचित्र:-

16 महाजनपद मैप
16 महाजनपद मैप

16 महाजनपद और उनकी विशेषताए:-

16 महाजनपद जो भारतीय भू-भाग में थे कि सूची निम्नलिेखित है। इन महाजनपदो में दो महाजनपद-वज्जि व मल्ल में गणतंत्रातमक शासन प्रणाली थी।

1. कम्बोज:

  • राजधानी-हाटक (राजपुर)
  • दक्षिणी पश्चिमी कश्मीर व कपीशा के आसपास का क्षेत्र इसमें सम्मिलित है।
  • कौटिल्य ने कंबोज को ‘ वार्ताशास्त्रोंपजीबी संघ’ अर्थात वार्ता (कृषि, पशुपालन व वाणिज्य) तथा शास्त्रोंपजीबी (शस्त्रों द्वारा जीविका चलाने वाला) कहा है।
  • यह श्रेष्ठ घोड़ों के लिए विख्यात है।
  • यहां की तलवारे बहुत अच्छी होती हैं।

2. गंधार:

  • राजधानी-तक्षशिला (रामायण से ज्ञात भरत के पुत्र तक्ष द्वारा स्थापित)
  • शासक-पुष्करसारिन (बिम्बयसार का समकालीन)
  • इसने अवन्ति के राजा चण्डप्रद्योत को पराजित किया।
  • मगध नरेश बिम्बसार ने इसके दरबार में एक दूत भेजा था।
  • इसका दूसरा प्रमुख नगर पुष्कलावती ( आधुनिक नाम चारसद्धा) है।

3. कुरू:

  • राजधानी – इसकी दो राजधानियां थी-
  1. यमुना के किनारे-इंद्रप्रस्थ (दिल्ली)
  2. गंगा किनारे-हस्तिनापुर (मेरठ, दिल्ली व थानेश्वर)
  • इसका उल्लेख महाभारत व पाणिनी द्वारा रचित ग्रंथ अष्टाध्यायी में मिलता है।
  • बुद्ध के समय यहां का शासक कोरत्य था।
  • प्रारंभ में यहां राजतंत्र था किंतु कालांतर में गणतंत्र व्यवस्था स्थापित हो गई।
  • मध्यकालीन हस्तिनापुर इसी के अंतर्गत शासित था।

4. शूरसेन :

  • राजधानी – मथुरा व ब्रजमंडल ( यमुना नदी के तट पर )
  • प्राचीन यूनानी लेखक इस राज्य को शूरसोनोई तथा इसका राजधानी को मेथोरा कहते थे।
  • शासक: अवंतिपुत्र
  • मेगस्थनीज की पुस्तक इण्डिका में इसका उल्लेख रहता है।

5. वत्सः

  • राजधानी- कौशाम्बी (वर्तमान इलाहाबाद व बांदा के जिले)
  • यहाँ का शासक उदयन ( पौरव वंश ) बौद्ध शिष्य पिण्डोल से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया।
  • स्वप्नवासवदत्ता ( भाष्य का प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ) में उदयन और वासवदत्ता के प्रेम कथा का वर्णन है। ( अवंति नरेश चंद्र प्रद्युत की पुत्री)
  • गन्धिकों ( इत्र बनाने का काम करते ) के सिक्के कौशाम्बी से प्राप्त हुये।
  • अवन्ति ने इस पर आक्रमण करके इस पर अधिकार कर लिया।
  • अन्तिम रुप से मगध नरेश शिशुनाग द्वारा मगध में विलय कर लिया गया।

6. काशीः

  • राजधानी – बनारस (राजा बानर के नाम पर)
  • संस्थापक – द्रिवोदास
  • काशी का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है।
  • दशरथ जातक के अनुसार राम काशी के राजा थे।
  • कौशल के राजा कंस ने इस पर आक्रमण कर अपने राज्य में मिला लिया।
  • काशी सूती वस्त्रों व घोडों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था।

7. मगधः

  • राजधानी – गिरिव्रज (राजग्रह)- वर्तमान पटना व गया जिले में
  • यह सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था। जिसने बाद में अन्य जनपदों का विलय कर लिया।
  • इसके शासक विजय व वैवाहिक संबंधो के द्वारा साम्राज्य का विस्तार कियें।
  • इसका सर्व प्रथम उल्लेख अथर्ववेद में है। जिसमे मगध के निवासियों को व्रात्य कहा गया है।

8. अंगः

  • राजधानी- चम्पा (प्राचीन नाम मालिनी )
  • क्षेत्र – वर्तमान भागलपुर व मुंगेर जिले में
  • इसकी राजधानी चंपा की गणना बुद्धकालीन 6 बडे नगरों में की गयी है।
  • चम्पा एक नियोजित नगर था जिसका वास्तुकार महागोविन्द था।
  • अंग का उल्लेख सर्वप्रथम अथर्ववेद में मिलता है।
  • अंग के शासक ब्रम्हदत्त ने भद्दिय को पराजित किया। किन्तु अन्ततः अंग को मगध में मिला लिया गया।

9. पांचाल:

  • राजधानी- इसकी दो राजधानी थी –
  1. उत्तरी पांचाल की अहिच्छत्र (बरेली का वर्तमान रामनगर)
  2. दक्षिण पांचाल की काम्पिल्य (फर्रुखबाद)
  • शासक चुलामी ब्रम्हदत्त था।
  • इसका उल्लेख महाभारत व पाणिनी द्वारा रचित ग्रंथ अष्टाध्यायी में मिलता है।
  • द्रोपदी इसी राज्य की कन्या थी।
  • कान्यकुब्ज का प्रसिद्ध नगर इसी राज्य में स्थित था।

10. कौशल:

  • राजधानी- इसकी दो राजधानियाँ थी
  1. उत्तरी कौशल – श्रावस्ती (उपनाम – सहेत-महेत)
  2. दक्षिण कौशल – साकेत ( कथावती ) वर्तमान अयोध्या
  • क्षेत्र – सरयू नदी का क्षेत्र
  • शासक – प्रसेनजीत ( बुद्ध का समकालीन )
  • प्रसेनजीत ने अपनी पुत्री वाजिरा का विवाह मगध शासक अजातशत्रु के साथ किया। जिसमें काशी दहेज में दियां।
  • रामायण में राजधानी श्रावस्ती से अयोध्या (साकेत) में स्थापित हुई।
  • श्रावस्ती का नगर विन्यास अर्द्धचन्द्राकार था।

11. वज्जि ( 8 कुलों का संघ ):

  • राजधानी – विदेह व मिथिला
  • पहचान: आधुनिक बसाढ से
  • इसमें वज्जि के अलावा वैशाली के लिच्छवि मिथिला के विद्रोह व कुण्डग्राम के ज्ञातृक प्रसिद्ध थे।
  • वैशाली के लिच्छवी सबसे शक्तिशाली संघ थे तथा इसने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया।
  • सुत्तनिपात में वैशाली को मगधम पुरम कहा गया है।

12. मल्लः

  • राजधानी – इसकी दो राजधानी थी।
  1. कुशीनारा (कुशीनगर उ प्र)
  2. पावापुरी ( नालंदा जिला बिहार )
  • इसका शासक ओक्काक था।
  • यहाँ गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली थीं।

13. चेदीः

  • राजधानी – सोत्थिवती नगर ( महाभारत काल में शुक्तिमती )
  • क्षेत्र – मध्य प्रदेश व बुन्देलखण्ड का यमुना नदी क्षेत्र
  • यहाँ का शासक शिशुपाल था। जिसका वध भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र द्वारा किया।

14. अवन्ति:

  • राजधानी – इसकी दो राजधानियाँ थी।
  1. उत्तरी अवंति की उज्जयिनी ( संस्थापक अच्चुतगुनी )
  2. दक्षिणी अवंति की महिष्मति
  • दोनो राजधानियों के बीच वेत्रावती नदी बहती थी।
  • यहाँ का शासक चण्डप्रद्योत ( बुद्ध का समकालीन ) था जिसके दरबार में शासक बिम्बिसार ने राजवैद्ध जीवक ( गणिका सालवती का पुत्र ) को भेजा था।
  • चण्डप्रद्योत महाकच्चायन के प्रभाव से बौद्ध धर्म धारण कर लिया।
  • गांधार शासक पुष्कर सारिन ने इसको हटाया था।
  • शिशुनाग में अवंति का विलय मगध साम्राज्य में किया।

15. मत्स्य:

  • राजधानी – विराटनगर ( राजा विराट द्वारा )
  • क्षेत्र – चम्बल व सरस्वती नदी के बीच स्थित था।
  • यहाँ पांडुवो ने 13 वर्षो का वनवास व्यतीत किये थे।

16. अश्मक:

  • राजधानी – प्रतिष्ठान ( पैथान ) पोटन ( पोटली )
  • एकमात्र महाजनपद जो दक्षिण भारत में स्थित था।
  • क्षेत्र – गोदावरी नदी के दक्षिणी भाग में विस्तृत।
  • बुद्धकाल में अवंति ने अश्मक को जीत लिया था।

चार शक्तिशाली राजतंत्र:-

10 महाजनपदों का आपसी संघर्ष एवं प्रतिद्वंद्विता के कारण छठी शताब्दी ई. पू.  के उत्तरार्ध में उत्तर भारत में 4 शक्तिशाली राज्यों का प्रभुत्व रह जाता है। अर्थात अनेक छोटे जनपदों का बड़े राज्यों में विलय हो गया और इस तरह केवल 4 बड़े राज्य प्रमुख रहे-

  1. कौशल
  2. वत्स
  3. अवन्ति
  4. मगध

 

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